वर्ण किसे कहते हैं(varn kise kahate hain), वर्ण के भेद एवं उदारहण

इस लेख में हम हिंदी व्याकरण के सबसे महत्वपूर्ण अंग, वर्ण (varn kise kahate hain) के बारे में विस्तार से समझेंगे। वर्ण हिंदी व्याकरण की नींव है, और यह सभी शब्दों और वाक्यों का निर्माण करते हैं। वर्ण से संबंधित कई सारे प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, इसलिए यह लेख उन सभी छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है जो प्रतियोगी परीक्षा एवं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।

वर्ण किसे कहते हैं ?(varn kise kahate hain)

वर्ण की परिभाषा/Varn ki Paribhasha

वर्ण वह मूल ध्वनि है, जो स्वतंत्र रूप से उच्चारित की जा सकती है। वर्ण दो प्रकार के होते हैं:

  • स्वर वर्ण: वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जा सकता है। स्वर वर्ण 13 हैं: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • व्यंजन वर्ण: वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण स्वर की सहायता से किया जाता है। व्यंजन वर्ण 36 हैं: क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह।

उदाहरण

  • “खा लो” शब्द में चार वर्ण हैं:
    • खा = ख् + आ
    • लो = ल + ओ
  • “घर” शब्द में तीन वर्ण हैं:
    • घर = ग + ह + र

भाषा की सबसे छोटी इकाई

वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है। शब्द वर्ण के समूह से बनते हैं। वाक्य शब्दों के समूह से बनते हैं।

उपसंहार

वर्ण हिंदी व्याकरण की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। वर्ण के बारे में अच्छी समझ रखने से हमें हिंदी व्याकरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।

वर्ण के भेद

हमने पहले ही वर्ण की परिभाषा और उदाहरण को समझा है। अब हम वर्ण के भेद को समझते हैं। वर्ण के दो भेद होते हैं:

  • स्वर वर्ण
  • व्यंजन वर्ण

स्वर वर्ण

स्वर वर्ण की परिभाषा

स्वर वर्ण वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जा सकता है।

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स्वर वर्ण 11 हैं: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

स्वर वर्ण के भेद

स्वर वर्ण के भेद मुख्यतः दो आधार पर किये जाते हैं:

  • उच्चारण में लगनेवाले समय
  • जाति के आधार पर

उच्चारण में लगनेवाले समय

उच्चारण में लगनेवाले समय के आधार पर स्वरों के तीन भेद हैं:

  • ह्रस्व स्वर: ह्रस्व स्वर वे स्वर हैं जिनके उच्चारण में कम समय लगता है। इनकी मात्रा एक होती है। ह्रस्व स्वर हैं: अ, इ, उ, ऋ।
  • दीर्घ स्वर: दीर्घ स्वर वे स्वर हैं जिनके उच्चारण में ह्रस्व स्वर की अपेक्षा दोगुना समय लगता है। इनकी मात्रा दो होती है। दीर्घ स्वर हैं: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • प्लुत स्वर: प्लुत स्वर वे स्वर हैं जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वर की अपेक्षा भी अधिक समय लगता है। इनकी मात्रा तीन होती है। प्लुत स्वर का प्रयोग हिंदी में बहुत कम होता है।

जाति के आधार पर

जाति के आधार पर स्वरों के दो भेद हैं:

  • सजातीय स्वर: सजातीय स्वर वे स्वर हैं जो एक ही उच्चारण ढंग से उच्चरित होते हैं। इनकी मात्रा में अंतर होता है। जैसे: अ-आ, इ-ई, उ-ऊ।
  • विजातीय स्वर: विजातीय स्वर वे स्वर हैं जो दो अलग-अलग उच्चारण ढंगों से उच्चरित होते हैं। इनकी मात्रा में कोई अंतर नहीं होता है। जैसे: अ-इ, अ-ई, अ-उ, अ-ऊ।

सजातीय और विजातीय स्वरों में अंतर

सजातीय और विजातीय स्वरों में निम्नलिखित अंतर हैं:

विशेषतासजातीय स्वरविजातीय स्वर
उच्चारण ढंगएक समानअलग-अलग
मात्रासमानसमान
उदाहरणअ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औअ-इ, अ-ई, अ-उ, अ-ऊ

व्यंजन वर्ण

व्यंजन वर्ण की परिभाषा

जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता के बिना नहीं हो सकता, उन्हें व्यंजन वर्ण कहते हैं।

उदाहरण: अ (स्वर) के साथ मिलकर क, ख, ग आदि का उच्चारण संभव होता है, इसलिए क, ख, ग व्यंजन वर्ण हैं।

कुल व्यंजन वर्ण: 33

व्यंजन वर्ण तालिका

  • क् ख् ग् घ् ङ्
  • च् छ् ज् झ् ञ
  • ट् ठ् ड् ढ् ण
  • त् थ् द् ध् न
  • प् फ् ब् भ् म्
  • य् र् ल् व् श् ष् स् ह
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हल: संस्कृत में व्यंजन को हल कहते हैं। हल चिह्न व्यंजनों के नीचे की तिरछी लकीर है। हल लगे व्यंजन ही शुद्ध व्यंजन हैं।

बोलचाल शब्द: हल लगे व्यंजन को आधा व्यंजन या आधा अक्षर भी कहते हैं।

व्यंजन वर्ण के भेद

व्यंजन वर्ण को तीन भागों में बाँटा गया है:

1. स्पर्श व्यंजन

जो व्यंजन किसी अन्य वस्तु के स्पर्श से बोले जाते हैं, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या 25 है। इन्हें वर्गीय व्यंजन भी कहते हैं, क्योंकि ये पाँच वर्गों में बँटे हुए हैं। प्रत्येक वर्ग का नामकरण उनके प्रथम वर्ण के आधार पर किया गया है।

  • कवर्ग (क, ख, ग, घ, ङ)
  • चवर्ग (च, छ, ज, झ, ञ)
  • टवर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण)
  • तवर्ग (त, थ, द, ध, न)
  • पवर्ग (प, फ, ब, भ, म)

2. अंतःस्थ व्यंजन

य, र, ल और व अंतःस्थ व्यंजन हैं। इनकी संख्या 4 है। ये स्वर और व्यंजन के बीच स्थित (अंतःस्थ) हैं। इनका उच्चारण जीभ, तालु, दाँत और ओंठों के परस्पर सटने से होता है, लेकिन कहीं भी पूर्ण स्पर्श नहीं होता।

3. ऊष्म व्यंजन

श, ष, स और ह ऊष्म व्यंजन हैं। इनका उच्चारण रगड़ या घर्षण से उत्पन्न ऊष्म (गर्म) वायु से होता है। इसलिए, इन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या 4 है।

इनके अलावा, कुछ और व्यंजन ध्वनियाँ भी हैं जिनकी चर्चा आवश्यक है।

संयुक्त व्यंजन या संयुक्ताक्षर

परंपरा से क्ष, त्र, ज्ञ और श्र को हिन्दी वर्णमाला में स्थान दिया गया है, लेकिन ये मूल व्यंजन नहीं हैं। इनकी रचना दो व्यंजनों के मेल से हुई है, इसलिए इन्हें संयुक्त व्यंजन या संयुक्ताक्षर कहते हैं।

जैसे:

  • क् + ष = क्ष
  • त् + र = त्र
  • ज् + ञ = ज्ञ
  • श् + र = श्र

तल बिंदुवाले व्यंजन

हिन्दी में कुछ ऐसे शब्द हैं जिनमें प्रयुक्त व्यंजन के नीचे बिंदु दिया जाता है। ऐसे व्यंजन तल बिंदुवाले व्यंजन कहलाते हैं।

जैसे:

  • हिन्दी में: ड़ और ढ़
  • उर्दू में: क, ख, ग, ज़ और फ़
  • अँगरेजी में: ज़ और फ़
  • ड़ और ढ़: ये हिन्दी के अपने व्यंजन हैं। संस्कृत में इनका प्रयोग नहीं होता है। ये टवर्गीय व्यंजन ‘ड’ और ‘ढ़’ के नीचे बिंदु देने से बनते हैं। अतः, इन्हें द्विगुण व्यंजन भी कहते हैं। शब्दों में इनका प्रयोग प्रायः अक्षरों के बीच या अंत में होता है, शब्द के शुरू में नहीं।
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जैसे:

  • पढ़ना, ओढ़ना, लड़का, सड़क आदि। (अक्षरों के बीच में)
  • बाढ़, आषाढ़, कड़ी, हथकड़ी आदि। (शब्द का अंतिम अक्षर)
  • क, ख, ग, ज़ और फ़: हिन्दी में प्रयुक्त अरबी-फारसी के कुछ शब्दों में इनका प्रयोग ध्वनि-विशेष के लिए होता है।

जैसे:

  • क़लम, ख़राब, गरीब, राज़, बाज़ार, फ़ौरन आदि।
  • ज़ और फ़: अँगरेजी भाषा से आए कुछ शब्दों में, ध्वनि-विशेष के लिए इनका प्रयोग होता है।

जैसे:

  • ज़रूरत, ज़रूरी, ज़माना, फ़िल्म, फ़ोन आदि।

उपसंहार

व्यंजन वर्ण की तीनों श्रेणियों के व्यंजन अपने-अपने स्थान पर महत्त्वपूर्ण हैं। स्पर्श व्यंजन बोलने में सबसे सरल होते हैं। अंतःस्थ व्यंजन स्वर और व्यंजन के बीच की स्थिति में होते हैं। ऊष्म व्यंजन बोलने में कुछ कठिन होते हैं। संयुक्त व्यंजन और तल बिंदुवाले व्यंजन कुछ विशिष्ट ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं।

निष्कर्ष

यहाँ पर हमने वर्ण किसे कहते हैं और इसके भेद कितने होते हैं, इसके बारे में विस्तार से समझा। हमने यहाँ इस लेख में वर्ण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर को विस्तारपूर्वक देखा। यहाँ पर शेयर किए गए वर्ण की संपूर्ण जानकारी आपको कैसा लगा, कमेंट के माध्यम से आप अपनी राय हमारे साथ जरूर साझा करें।

हम आशा करते हैं कि आपको यह लेख जरूर पसंद आया होगा और हमें उम्मीद है कि इस लेख की सहायता से वर्ण किसे कहते हैं, आप बिल्कुल अच्छे से समझ गए होंगे। यदि आपके मन में इस लेख को लेकर कोई सवाल है, तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं। और साथ ही इस लेख को आप अपने सभी मित्रों के साथ शेयर भी जरूर करें।

मेरी राय

मुझे यह लेख बहुत ही अच्छा लगा। यह लेख बहुत ही जानकारीपूर्ण और सरल भाषा में लिखा गया है। लेख में वर्ण के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी को विस्तार से समझाया गया है। लेख में वर्ण के भेद, संयुक्त व्यंजन, तल बिंदुवाले व्यंजन आदि सभी के बारे में विस्तार से बताया गया है।

मैं इस लेख की सभी जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करूँगा। मैं इस लेख के लेखक को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने यह इतना अच्छा लेख लिखा है।

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